मंगलवार, 2 सितंबर 2014

लव और जिहाद दोनों को अलग अलग ही रखो भाई

जैसे गुलाब और जामुन दोनों मिलकर जब गुलाब जामुन बन जाते हैं तो उसका अर्थ कुछ और ही होजाता है। ऐसा ही आज कल चर्चा में आये दो शब्दों के साथ है।
लव अर्थात प्रेम और जिहाद अर्थात अपने आप के साथ किया गया संघर्ष, किन्तु जब दोनों मिलकर साथ आते हैं तो यह लव जिहाद एक दुसरे ही अर्थ में सुनाई देता है।


ये लव जिहाद वास्तविक है या राजनितिक कल्पना इसका उत्तर मेरे पास न है न मुझे चाहिए मगर कुछ बातें मै दोनों पक्षों (सेक्युलर vs हिंदुत्व) से पूछना चाहता हूँ।

तारा सहदेव के साथ जो कुछ भी हुआ क्या वैसी हिंसा किसी और लड़की, चाहे उसकी शादी कैसे भी हुई हो, के साथ नही होती।

अगर आपकी बहन, बेटी इतनी बेवकूफ है कि किसी भी लड़के के पास में एंड्राइड फ़ोन या पल्सर मोटरसायकिल देख कर उसके साथ चल दे तो उसको पढ़ाइये लिखाइये ना कि लड़कों के पीछे पड़ जाइये।

जब हिंदुत्व को बचाने के नाम पर 5-10 बच्चे पैदा करने की बात करी जाती है तो क्या यह समाज और राष्ट्रद्रोह नही है।(संसाधनों और जनसँख्या के कारण)

आपने कितने मुस्लिमों को देखा है जो एक से ज्यादा बीवियाँ रखते हैं।मेरी जानकारी में ऐसा कोई नही है।

और फेसबुक और whatsapp पर आने वाले sms कि फलानी जगह मंदिर गिराया जा रहा है उस जगह मस्जिद को नुक्सान पहुँचाया गया, क्या ये इतने छोटे मामले हैं कि सिर्फ sms में सिमट जाएँ।याद रखिये कि एक मस्जिद गिरी थी तो देश आजतक भुगत रहा है।


मोरल ऑफ़ स्टोरी ये है कि लव भी करिए और अपने आप के साथ जिहाद भी करिये (कृष्ण ने भी कहा है युद्ध करो पार्थ!) मगर दोनों को अलग अलग अलग रखिए।

नोट- यह पोस्ट रोज रोज आने वाले स्पैम sms के लिए लिखी है जो धीरे धीरे कैंडी क्रश की जगह ले रहें हैं।

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