लिखने के कई फायदे हैं इनमे सबसे बड़ा साइड बेनिफिट् है कि अनजान लोग अचानक से आकर आप से कुछ ऐसा कह जाते हैं कि उससे मिलने वाली ख़ुशी कभी कभी बॉस के दिए सैलरी इन्क्रीमेंट से भी नही मिलती।
10 फरवरी को प्रणय पर्व् (वैलेंटाइन डे) के उपलक्ष्य में दैनिक जागरण ने मेरी दो छोटी सी कवितायेँ पुनर्नवा में छापी।
इसके बाद कई लोगों के ख़त आये जो मन को छु गए और जो अंकल अक्सर कहा करते थे, "बेटा! इन सब की कोई वैल्यू नही है ।" वो अब ज़रा कम मिला करते हैं।
खैर 6 महीने के बाद अचानक से एक ख़त आज फिर आया और ख़त पढने के बाद दिन भर की सारी थकान और टेंशन गायब हो गयी।
नीरज कुमार गौतम जी के लिखे इस पत्र की शैली और भाषा किसी भी श्रेष्ठ कविता से कम नही है और अगर आप को लगता हो की ढंग का लेखन सिर्फ फेसबुक पर ही बचा है तो कृपया इस पत्र को पढ़ कर एक बार फिर से विचार करिए।
जाते जाते वो दो कवितायेँ भी दे दे रहा हूँ।
सुरमई से आकाश में
तुम्हारी बातों की
ये नादान मिलावट,
मानों,
कृष्ण की बांसुरी पर
राधिका के नूपुरों ने
ताल दी हो।
स्कूल की नोटबुक के पीछे
एक नाम
लिखकर के काटा था,
आज नन्ही बिटिया को
उसी नाम से पुकारता हूँ।

10 फरवरी को प्रणय पर्व् (वैलेंटाइन डे) के उपलक्ष्य में दैनिक जागरण ने मेरी दो छोटी सी कवितायेँ पुनर्नवा में छापी।
इसके बाद कई लोगों के ख़त आये जो मन को छु गए और जो अंकल अक्सर कहा करते थे, "बेटा! इन सब की कोई वैल्यू नही है ।" वो अब ज़रा कम मिला करते हैं।
खैर 6 महीने के बाद अचानक से एक ख़त आज फिर आया और ख़त पढने के बाद दिन भर की सारी थकान और टेंशन गायब हो गयी।
नीरज कुमार गौतम जी के लिखे इस पत्र की शैली और भाषा किसी भी श्रेष्ठ कविता से कम नही है और अगर आप को लगता हो की ढंग का लेखन सिर्फ फेसबुक पर ही बचा है तो कृपया इस पत्र को पढ़ कर एक बार फिर से विचार करिए।
जाते जाते वो दो कवितायेँ भी दे दे रहा हूँ।
सुरमई से आकाश में
तुम्हारी बातों की
ये नादान मिलावट,
मानों,
कृष्ण की बांसुरी पर
राधिका के नूपुरों ने
ताल दी हो।
स्कूल की नोटबुक के पीछे
एक नाम
लिखकर के काटा था,
आज नन्ही बिटिया को
उसी नाम से पुकारता हूँ।

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