और हम-आप भले ही आगरा जाने के अर्थ से एक विशेष प्रकार के अस्पताल की याद कर मुस्कुरा उठते हों मगर दुनिया भर के लोग इस संगेमरमरी मकबरे को इश्क का प्रतीक मान कर इसे देखने आते हैं।
गुरुदेव टैगोर ने जिस ताजमहल को काल के कपोल पर ठहरा हुआ प्रेम का आंसू कह कर संबोधित किया था, उस ताज का ज़िक्र
'मुमताज' के बिना नही पूरा हो सकता ।
मुमताज यानि की मुमताज महल। मुग़ल बादशाह शाहजहाँ की एक बेगम।
मगर आज ध्यान मुमताज से ज्यादा उसके नाम में लगे महल शब्द पर दीजियेगा।
हजरत महल, मुमताज महल, जीनत महल आदि के नाम में लगा महल शब्द कोई उपनाम नही है
अपितु यह एक पद (रैंक) है।
और इस रैंक की कहानी कुछ यूँ है
हर बादशाह के हरम में हर साल कई बांदियाँ खरीदी जाती थीं जिनके काम अलग अलग होते थे। कुछ बेगमों की खिदमत में लगी रहती थीं कुछ जहाँपनाह की।
और कुछ का काम बादशाह की ख़ास टाइप की सेवा करना होता था।
दरअसल उस दौर में सनी लियॉन के विडिओ और शर्लिन चोपड़ा की फोटो तो मिलते नही थे तो कुछ ख़ास बांदियाँ इन्ही के जैसी अवस्था में बादशाह सलामत की खिदमत में लगी रहती थीं।
और जब किसी दासी को एक रात के लिए बादशाह के बिस्तर पर बेगम की जगह सोने का हुकुम मिलता तो वह बाँदी से परी कहलाने लगती थी।
अगर ये सौभाग्य एक साल में दो बार या ज्यादा मिलता तो ये परी, हुस्न परी कहलाने लगतीं थी।
और अगर किसी परी की कोख में शाही वारिस आ जाये तो उसका पद महल हो जाता था।
चाहे हजरत महल हों या कोई और सब की कहानी यहीं से शुरू होती है।
मगर मुमताज की कहानी में कुछ और भी झोल हैं
अंजुमन बानो नाम की कम उम्र की लड़की हरम में आई और 2-3 सालों में ही पारी बनकर मुमताज महल कहलाने लगी।
दर्जन भर ऑफिसियल सौतनों के साथ मिले
14 साल के वैवाहिक जीवन में वो 14 बार माँ बनी
और आखिरी बच्चे के जन्म के साथ ही उसका इन्तेकाल होगया।
इसके बाद शाहजहाँ को उसकी इतनी याद आई की उसने तुरंत ही उसकी छोटी बहन से निकाह पढवा लिया (शायद वो भी मुमताज़ भाभी जैसी बिरयानी पकाती हो)
खैर ! अगली बार जब आपकी गर्लफ्रेंड आपसे कहे की
शोना मेरे लिए ताजमहल बनवाओगे क्या ?
तो उसकी आँखों में आँखें डाल कर .............
खुद ही समझाना यार मुझे मत फंसाओ इनसब में
अगला किस्सा भी तो तैयार करना है।
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